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दरिया

मेरे  इस  किनारे से जाने का आ गया है वक़्त
जिस किनारे पर है मेरा आशियाना
मां का आंचल, मेहबूबा की गोद
भाई की हिफाज़त, पिता का संरक्षण ।

साथ तो ले जाऊंगा बस एक बस्ता
जिसमें भरूंगा यादों का पिटारा
शायद ना समेट पाऊ सब
इसलिए आऊंगा लौट कर दुबारा ।

एकदम नया होगा सफ़र
अनजाने से होंगे लोग
नई मशाले जलाऊंगा अब
और शायद बने नए संजोग ।

मेरी कश्ती का मैं होऊंगा नाविक
ये दरिया होगा मेरा पथ प्रदर्शक
कभी उठेंगे उफ़ान भयंकर
कभी डगमग होगी नाव मेरी
हर मील पर होगा इम्तेहान
लहरें होगी मेरी परीक्षक ।

इस सागर के विशाल घमंड से
भयभीत ही सही, लड़ जाऊंगा मैं
हर मुसीबत को लांघ कर
हर पड़ाव को पार कर
वापिस उस किनारे को आऊंगा मैं ।

हलक से निवाला उतरेगा तो मेरे
पर पेट नहीं, मन भर आएगा
मेरी उस मां का खयाल आएगा मुझे
जो बोली थी: बेटा वहां रोटी कौन खिलाएगा ?

सैर- सपाटा तो होगा निश्चिंत
देखूंगा जो होगा अभूतपूर्व
आंखें भर आएंगी, सोचकर चार दिवारी
जहा छोटे भाई से की बातें ढेर सारी ।

सुबह की किरणों से भी पहले
पक्षियों को जगाऊंगा मैं
सोचकर चेहरे पर आएगी मुस्कुराहट
बिस्तर से फट उठ जाता था डर कर
मात्र सुनकर पिता की आहट ।

तादाद में दिखेंगी यूं तो अप्सराएं
होगी हुस्न की काफ़ी नुमाइश
पर मेरी हर बात को सुनने वाली तो तू
और कौन करेगा पूरी ये ख्वाहिश ?

मेरा स्रोत भी वही किनारा
मेरी मंज़िल भी वही किनारा
इस ही दरिया के द्वारा
लौटकर आऊंगा फ़िर दोबारा ।

–  अंशिका मल्होत्रा

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#MeToo

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ना जानियो मुझको मेनका, ओ ब्रह्मचारी
कोई मतलब नहीं मुझे जो भंग करू तेरी तपस्या सारी

ना ही मानियो कि हूं मै सीता बेचारी
शक करेगा तो भी ना जाऊंगी अग्नि में मारी

ना ही हूं मै प्रचंड रूप वाली काली
कुपित है तू, भला बनू क्यों तेरा खून पीने वाली

दुर्गा भी नहीं हूं, संसार का दुख हरनेवाली
मै नहीं हूं वो जिसने ये सृष्टि संहारी

लड़ना भी नहीं आता जो समझे मुझे झांसी की रानी
ना खून बहाया मैंने, ना मै खूब लड़ी मर्दानी

अबला मान या मान मुझे सबला
तेरे कहने से कुछ भी तो नहीं बदला

तुझे कौनसा कहा मैंने राम या रावन
जो इस तरह झांके है तू मेरा मन

योगी ना जान खुदको तू बेईमान
ज़रा मुखौटा तो हटा, देखे ये जहान

कौन बना फ़िर रहा है मेरा रक्षक
क्या कौरव, क्या पांडव, निकले तो सब भक्षक ।

 –  अंशिका मल्होत्रा

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तो क्या हुआ दूर हूं तो ?

 

तो क्या हुआ दूर हूं तो ?
ये जो चांद दिख रहा है आधा 
कौनसा होगा उसके हिस्से ज़्यादा

 
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तो क्या हुआ दूर हूं तो ?
सिरहाने को जब समझा उसका हाथ
सोया था तब वो ही मेरे साथ

 
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तो क्या हुआ दूर हूं तो ?
जब जब मुझको हुआ कोई अाघात
ध्यान में आई बस उसकी ही बात

तो क्या हुआ दूर हूं तो ?
नहीं है वो यहा तो कोई गिला नहीं
क्योंकि उस जैसा कभी कोई मिला नहीं

तो क्या हुआ दूर हूं तो ?
उसके होने का हर पल रहता है एहसास
देखो, अभी भी बैठा है मेरे ही पास

 
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तो क्या हुआ दूर हूं तो ?
महसूस करती हूं जब भी उसकी आहटें
खुद – बखुद आ जाती है मुस्कुराहटें

तो क्या हुआ दूर हूं तो ?
देखो तो मेरे प्यार की सच्चाई
अभी फ़िर से उसको मेरी याद आई

तो क्या हुआ दूर हूं तो ?
शर्मा जाती हूं आए जो उसका ख्याल
यही मंज़र चल रहा है हाल – फिलहाल

तो क्या हुआ दूर हूं तो ?
इतनी शिद्दत है उसे देने की मोहब्बत
दूर होकर भी लगती है उससे बेइंतहां कुरबत ।

 

  अंशिका मल्होत्रा

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कम कहता हूं मैं

तू यू गुज़री आंखों के सामने से

जुल्फों ने तेरी हाथ सहलाया मेरा

महक तेरे जिस्म की रूह में भर रही

मन ही मन में बहका रहता हूं मैं

माफ़ कर पाओगी गर कहूं कम कहता हूं मैं।

 

जानता हूं तेरे इशारों को खूब

उंगली से उस लट को पीछे करना तेरा

कनखियो से देखती हैं तेरी निगाहे मुझे

आंखें मूंद कर थोड़ा शरमा लेता हूं मैं

मान जाना गर लगे कि कम कहता हूं मैं।

 

लगाती हो ये बिंदी अपने माथे पर

काजल भी जचता है तुम्हारे नैनों में

गिराया था अपना दुपट्टा जानबूझकर मेरे पास में

चलो ,प्यार समझकर उठा लेता हूं  मैं

नि:शब्द ही लौटा दूंगा क्यूकी कम कहता हूं मैं।

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आज जब आई हो हारकर खुद ही करीब

तेज से भरी आंखें देख रह गया दंग मैं

ये अरूण कपोलों पर लाली है या आक्रोश तुम्हारा

चलो, अपनी खामोशी से ही समझा देता हूं मैं

बाकी जानती तो हो कि कम कहता हूं मैं।

 

इतना आग्रह जो कर रही थी तुम

इसलिए प्यार की बात बता ही दी तुम्हे

अब खुश हो इतनी कि आंसू बेह रह हैं तुम्हारे

गिला हो रहा है इतना कि अब ये सोचता हूं मैं

अच्छा ही है ,जो कम कहता हूं मैं ।

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  अंशिका मल्होत्रा

 

     

                                                                                            

 

 

 

 

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नए किस्से शुरू होते है बरसात में

Screenshot_20180725-121535__01.jpgनए किस्से शुरू होते है बरसात में
पेड़ों की हरियाली हो या
मोर नाचे छत के आयात पे
नए किस्से शुरू होते है बरसात में

हुआ सावन का आगमन
बरस बरस दे जाते है
मेघ भी शीतलता ये सौगात में
नए किस्से शुरू होते है बरसात में

ये मौसम याद दिलाता है
दिन जो ना है अब मेरे हाथ में
पुराने किस्से दे जाते है आंसू आंख में
नए किस्से शुरू होते है बरसात में

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पहले प्यार का तोहफा हो
या बहकी बहकी हसीन रात हो
दिल को छेड़ने वाली नहीं लगी
जो बात थी उस आखिरी मुलाकात में
नए किस्से शुरू होते है बरसात में

आज फिर आगमन हुआ
छम छम करती बूंदों का
देख रही हूं छज्जे से बाहर
बैठी उसके साथ में
नए किस्से शुरू होते है बरसात में ।

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 The Typewriter

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“How old school can she be? She wants a typewriter in lieu of a laptop.”
“Maybe some hitch for possessing such not-so-common item. O yes! She loves stationery!”
“Now it’s comprehensive that what kind of a girl is she. Why can’t just she get it? I mean if she is that desperate to have it, get it. It’s not that she can’t.”

“Of course I can”, She enters the room and served the coffee to both of them.” But wait.Did you say desperate?”, She throws the cushion aiming Maria while making herself comfortable on the bed.
All of them shared a giggle and sipped the coffee from their mugs.
Meanwhile, Maria got a call and she went to the balcony to attend it.

“Hey see, how is it?”, Asked Trisha.
Trisha showed her a Tag Heuer for women on her cell phone. Obviously, it has to be a wow.
“Nice”, sipped her coffee.
“Naman bought this for my birthday”, told Trisha enthusiastically.
“F-ck! Are you kidding me?”, She almost spilled the coffee.
“But..umm…why..why a?? Why a watch? You already have four watches. How many hands do you have witch?”
” Arre, don’t you even know what to question? You could have asked, why a Tag Heuer? Idiot, Trisha nudged her to keep the empty mug on the table.

“Did she show you the watch? How is it? Nice naa?”, Maria returned.

 All she could do was agree. Because her judgments and criticisms are unviable. They are amongst the normal people. They can’t be wrong.

But what about her? She is no different. Just a tit-bit here and there. All she ever wished for was the significance of the gifts and gestures. For her, the typewriter is something which describes that he is a keeper. He values her sentiments and will always encourage her to follow her dreams and pursue the same with passion. Also, shouldn’t a person be thoughtful enough about the presents he gifts to his love?

“o hello! Lost? Let’s go.We are already late for the concert”, Maria pulls her out of her thoughts.

She smiled. Kissed her dog and left along with her friends for the concert.

 

 

Rest in Peace Tannu

Dear Tannu

I always had a lot to tell you. Mostly, Thank You. Thank you for being a wonderful person or should I say, an awesome person. Such a blithe soul you are, partying hard every night,  wearing the latest of the trend, so much flamboyance in a single soul. How much you love to travel and how much I got fascinated by the life you had. Although I really did not like this decision of yours. Travel as much as you want to. You could have opted for any place in the world if India did not give you many options. Why did you get so adventurous to go to heaven? Why did this apathy took you so far that you are not even going to come back? I know you do not actually care for anybody’s decision but for your own and of course, Unkle and Aunty’s who never actually questioned your decisions. But this time, they really didn’t want you to go. This very first time. Couldn’t you once accept it? 

I remember how Daddy always used to tell me- ” Be bold like Tannu. Fear nobody or nothing like her.” You know, it should have been irksome to me as to how he wanted me to be like you. However, it never was. Will he ever say that again to me? Didn’t you love to be a good example? I mean, I never minded being forthright like you. Had it been that you did not like me following you, you could have asked me. What was so perturbing that you went without even saying a word?

So many anecdotes I have about us, about you. I wonder if you remember them all. Do you remember the Mumbai trip? How we travelled in the ladies coach with a ticket of a general coach in a local train and then encountered the TT. It was quite a save dude. Later, me being an asshole to you for no reason. I am really sorry for that. I thought we buried the hatchet. You really shouldn’t avenge in this manner. Just come back and I will make up for it with a pup.

You had been my key to sneak out. All I had to do was call you and in no time, you were all set to take me out anywhere I want to. Were you tired of being an angel? Or you literally became one?

I just have to understand that it was necessary for you to free yourself from those perceptible shackles of the disease that deceased you. Not today, but the moment you stopped flying and contracted your world on a bed. Now that you have gone, you can fly high again.

Although I could not return your favour, I Love You. 

 

Munmun